राजनैतिक

आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में पहली बार सबसे ज्यादा महिलाएं पहुचेंगी विधानसभा

उत्तर प्रदेश की सियासत में महिलाओं ने अपनी धमक का एहसास कराना शुरू कर दिया है. पहली बार प्रदेश की विधानसभा 40 महिला विधायक दस्तक देंगी. इन महिला विधायकों में एक रानी हैं,

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उत्तर प्रदेश की सियासत में महिलाओं ने अपनी धमक का एहसास कराना शुरू कर दिया है. पहली बार प्रदेश की विधानसभा 40 महिला विधायक दस्तक देंगी.
इन महिला विधायकों में एक रानी हैं, जिन्होंने अपने ही राजघराने के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका और इसी राजघराने की दूसरी रानी को मात दी. एक जुझारू महिला है, जिसने अपनी बेटी के लिए एक पार्टी की सुप्रीमो के खिलाफ ही जंग छेड़ दी और साल भर के अंदर एक आम महिला से विधायक बन गईं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में महिलाओं ने अपनी धमक का एहसास कराना शुरू कर दिया है. पहली बार प्रदेश की विधानसभा 40 महिला विधायकों का इस्तेकबाल करेगी.
मुलायम परिवार को हार का स्वाद चखाने वाली एक कद्दावर महिला नेता है, तो अमेरिका से पढ़कर लौटी एक युवा लड़की भी है, जिसने अपने पहले ही चुनाव में उत्तर प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक दर्ज कर दी.


वैसे पार्टियों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा से सबसे ज्यादा 34 महिला विधायक जीती हैं. हालांकि कुल विधायकों में इनकी हिस्सेदारी करीब 11 फीसदी ही बैठती है. वहीं बसपा और कांग्रेस से दो-दो और सपा व अपना दल सोनेलाल से एक-एक महिला विधायक इस बार विधानसभा में नजर आएंगीं.

जब एक रानी ने दी दूसरी रानी को मात
बात रानी की करें तो हम आपको अमेठी लिए चलते हैं. यहां भाजपा से पहली बार टिकट हासिल कर अमेठी राजघराने की गरिमा सिंह ने जीत दर्ज की. चुनाव में गरिमा सिंह को सपा के गायत्री प्रजापति से जितनी चुनौती नहीं मिली, उससे कहीं ज्यादा उन्हें अपने ही राजघराने की चुनौतियों से जूझना पड़ा. पति संजय सिंह ने खुलेआम गरिमा सिंह का विरोध किया और दूसरी पत्नी अमिता सिंह को कांग्रेस से मैदान में उतार दिया.
वह भी सपा से गठबंधन होने के बाद भी. अमेठी की जनता को गरिमा के संघर्ष की लड़ाई दिल को छू गई, यही कारण रहा है कि जहां विजेता गरिमा ने 64 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए, वहीं अमिता सिंह करीब 20 हजार वोट ही पा सकीं और चुनाव में चौथे स्थान पर रहीं. चुनौतियों की बात करें तो खुद गरिमा सिंह ने कई बार बताया कि उनसे मिलने कोई भी आता है तो उन्हें महल के मुख्य द्वार के बाहर ही मिलने की अनुमति है.

आम महिला से विधायक बनने की कहानी लिख गईं स्वाति सिंह


अब हम बात करेंगे एक ऐसी महिला की, जिसके लिए राजनीति में आना किसी दुर्घटना से कम नहीं था. यूपी चुनाव से कुछ महीने पहले बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ भाजपा के दयाशंकर पर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगा. जवाबी हमले में बसपा के नेताओं ने दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह और उनके बेटी को लेकर अभद्र टिप्पणियां की और जमकर नारेबाजी की.
ये विरोध स्वाति को नागवार गुजरा और उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ उलटे हमला बोलना शुरू कर दिया. दयाशंकर को पार्टी से निष्कासित करने वाली भाजपा ने मौका नहीं गंवाया और स्वाति को पार्टी में प्रमुख चेहरा बना दिया. स्वाति यूपी में चुनाव में स्टार प्रचारक रहीं, यही नहीं लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से उन्हें पार्टी ने टिकट भी दे दिया.
दिलचस्प बात ये थी कि ये सीट सपा की मजबूत सीटों में एक मानी जाती थी और भाजपा तीन दशक से इस सीट पर जीत के तरस रही थी. यही नहीं स्वाति के सामने मुलायम सिंह यादव के भतीजे और सांसद धर्मेंद्र यादव के भाई अनुराग यादव की तगड़ी चुनौती भी थी. लेकिन स्वाति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 34 हजार वोटों से सपा को हराया. उपहार स्वरूप अब भाजपा ने स्वाति सिंह के पति दयाशंकर सिंह का भी निष्कासन वापस ले लिया है.

इस महिला विधायक को मुलायम की छोटी बहू भी नहीं दे सकीं चुनौती

महिलाओं की दावेदारियों की बात करें तो इस बार के चुनाव में लखनऊ कैंट सीट उत्तर प्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीटों में शुमार थी. एक तरफ भाजपा में शामिल हुई कद्दावर नेता डॉ रीता बहुगुणा जोशी थीं, तो दूसरी तरफ पहली बार चुनाव लड़ रहीं मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव थीं.
एक के प्रचार के लिए खुद गृहमंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे, तो दूसरे के समर्थन में मुलायम सिंह यादव पहुंचे. लेकिन चुनाव परिणाम में जनता ने डॉ रीता जोशी का ही साथ दिया. उन्होंने करीब 34 हजार वोट से अपर्णा यादव को मात दी. खास बात ये थी कि रीता जोशी ने इससे पहले 2012 में भाजपा को 20 हजार से ज्यादा मतों से हराया था.

अमेरिका से लौटी इस युवा का पहला चुनाव और रिकॉर्डतोड़ सफलता

एक और सीट थी, जिस पर जीत हार से कहीं ज्यादा ये चर्चा थी कि जीत का अंतर कितना रहेगा. जी हां, ये सीट थी रायबरेली विधानसभा. यहां रॉबिन हुड की छवि रखने वाले बाहुबल

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