विचार

लोकतंत्र का जुबानी दंगल

5 राज्यों का चुनावी दंगल आखिर खत्म हुआ, हम सस्ते फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेसन वालों ने बड़ी शांति से अपनी रस्म अदाएगी भी कर ली है।

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5 राज्यों का चुनावी दंगल आखिर खत्म हुआ, हम सस्ते फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेसन वालों ने बड़ी शांति से अपनी रस्म अदाएगी भी कर ली है। और अपने हिसाब से अपने-अपने पहलवान छाँट चुके है। सस्ते फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेसन मैंने इसलिए कह दिया, क्योंकि हम वोटर कार्ड और आधार कार्ड बनाकर भी फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेसन का पूरा आनन्द ले लेते हैंI चलो वापस दंगल के तरफ बढ़ते हैं। ये क्या ! यहाँ तो कुछ सियासी सुरमा अभी भी मुहँ फुलाकर बैठे हैं। कहते हैं कुछ गड़बड़ हुआ है, धोखा हुआ है,अपने सियासी अंदाज में बोल रहे हैं लोकतंत्र की हत्या हुई है I एक हाथी छाप सियासी कुनबा तो छाती पीट- पीट कर कह रहा है हमारे तकड़े पहलवान, दांव-पेच में माहिर होने के बाद भी हम दंगल में टिक ना पाए, यहां तक की लंगोठ भी नहीं बचा पाए I दंगल के नाम पर धोखा हुआ है I

इस दंगल के जीत हार के बाद कई सियासी कुनबे जैसे पंजा छाप, साइकिल छाप, हाथी छाप कुछ बिना छाप के सब सदमे में हैं। हम तो ये कह उनको ढाँढस बंधा रहे हैं कि चलो जनतंत्र की जीत हुई,पर ये हैं कि मानने को तैयार ही नहीं हैं,बस यही बात दोहराये हुए हैं कि गड़बड़ हुई है,लोकतंत्र की हत्या हुई है लंगोठ के अंदर की बात ये है कि दंगल जीता कुनबा इनको फूटी आँख नहीं सुहाता।

लोकतंत्र की हत्या वाली बात से आपको बताते चलूँ कि जिसे मैं चुनावी दंगल कह रहूं हूँ उसको पढ़े-लिखे अंदाज में लोकतंत्र का पावन पर्व या चुनाव कह देतें हैं। इस पावन पर्व के गुणधर्म रीति रिवाज तो आप सभी जानते हो,तो लोकतंत्र की हत्या या गड़बड़ कैसे हुई, भगवान् ही जाने I भगवान् से याद आया इस लोकतंत्र के पर्व का मुख्य आयोजक यानी चुनाव आयोग ने भी किसी हत्या या गड़बड़ी से इनकार कर दिया है I पर क्या करें जनाब इस लोकतंत्र में आज़ादी का इतना बड़ा मैदान,फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेसन के थैले में ढेर सारे खिलौने अभी वक्त भी है मौक़ा तो निकाल ही लेते हैं,चलो जैसे मर्जी खेल लेते हैंI

अभी के लिए चुनावी दंगल तो चलो खत्म हुआ पर सियासत का जुबानी दंगल तो इस लोकतंत्र के खुले मैदान में हमने बाड़े के उस पार से हर बार देखना है। ये किसी के चुनावी दंगल जीतने और किसी के हारने के बाद की ज़ुबानी दंगल है,जो फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का थैला खोलकर बेशर्मी की साथ लोकतंत्र खुले मैदान में ऐसे ही खेली जाती है I

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